Kahani Sangrah-System Total System - 3
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किसी के बिना किसी का काम नहीं रुकता।

गलत काम की शुरुआत आमतौर पर नादान व्यक्ति से नहीं ज्यादा समझदार व्यक्ति से होती है

कुत्ते को लगा की बैलगाड़ी उसके कारण चल रही है

किसी के बिना किसी का काम नहीं रुकता।
 
 

 एक बार की बात है एक परिवार के मुखिया को यह अभिमान हो गया की उसके बिना परिवार का गुजारा नहीं हो सकता क्योकि घर में वो ही अकेला इंसान था। जो कमाता था। एक दिन गाँव में एक महात्मा आये। वह आदमी भी महात्मा की बातो को सुनने के लिए चला गया।

वह महात्मा सभी को बता रहे थे। इस दुनिया में किसी के बिना किसी का काम नहीं रुकता। लेकिन फिर भी कुछ लोग अभिमान करते है की उनके बिना उनका परिवार और समाज रुक जायेगा। भगवान सभी को उनके भाग्य के अनुसार देता है।

महात्मा की बात खत्म होने के बाद सभी लोग वहाँ से चले गये। वह आदमी महात्मा के पास जाकर बोला – मैं अपने घर में अकेला कमाने वाला हूँ। मैं जो कमाकर लाता हूँ। उसी से मेरे परिवार का गुजारा होता है। अगर मैं ही नहीं रहूँगा तो मेरा घर कैसे चलेगा। महात्मा में कहा – तुम गलत सोचते हो। इस दुनिया में मौजूद हर इंसान को उसके भाग्य के अनुसार ही मिलता है। यह सुनकर वह आदमी बोला – मैं इस बात को नहीं मानता।

                                          उस महात्मा ने कहा – तुम ऐसा करो बिना किसी को बताए। कुछ दिनों के लिए गायब हो जाओ, और फिर तुम अपने आप ही देख लेना की तुम्हारे बिना कोई काम रुकता है या नहीं।

उस आदमी ने ऐसा ही किया और वह कुछ दिनों के लिए शहर चला गया। उसके जाने के बाद उस महात्मा ने गाँव में बात फैला दी की उस आदमी को शेर ने अपना शिकार बना लिया। जब पुरे गाँव में ये बात फैल गयी तो उस परिवार की मदत के लिए गाँव के लोग आगे आये।

उस आदमी का एक बेटा था। जिसे एक सेठ ने अपने यहाँ नौकरी पर रख लिया। उसकी एक बेटी भी थी। सभी गाँव वालो ने मिलकर उसकी बेटी की शादी भी करवा दी, और कुछ दिनों बाद सब वैसा ही हो गया। जैसा की पहले था। एक रात को चुपके से वह व्यक्ति अपने घर पहुँचा। उसने देखा की सभी लोग बहुत ही खुश थे और सुखी जीवन जी रहे थे। उस व्यक्ति ने अपने परिवार से माँफी मांगी, और कहा की मैं गलत था। आज मेरा घमंड चूर चूर हो गया।

Posted on :7/6/2018 12:12:00 PM
   
 
 
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